…. जिसका नाम है बीकानेर
Posted on 20 May 2009 by Vinay N. Joshi
….जिसका नाम है बीकानेर

बीकानेर केवल पापड़-भुजिया या रसगुल्ले के लिए ही प्रसिध्द नहीं है बल्कि रेतीले धोरों के बीच बसा यह जीवन्त प्रवृत्ति वाले लोगों का शहर है। इस शहर की अपनी बानगी है और अपनी दिलचस्प पहचान। उद्यमिता इस शहर के हर मन में कूट-कूट कर भरी है, तो साथ ही मस्ती का आलम भी कम नहीं है। यहां के अनेक उद्यमियों-कारोबारियों ने विश्वभर में अपना नाम कमाया, यहां बनी भुजिया-पापड़ आदि ने विश्व भर में अपनी पहुंच बनाई है, तो यहां की स्थानीय संस्कृति आज भी उतनी ही समृध्द है जितनी कि बरसों पहले हुआ करती थी।
वास्तव में छोटीकाशी

Swami Samvit SomGiri Ji Maharaj
यूं तो राजस्थान की राजधानी जयपुर को छोटीकाशी कहा जाता है, लेकिन व्यवहारिक दृष्टि से देखें तो बीकानेर वास्तव में छोटीकाशी के दर्जे का हकदार है। इसलिए कि यहां गली-मोहल्लों में न केवल मंदिरों और उसमें भी खासकर शिवमंदिरों की बहुतायत है बल्कि अन्य देवी-देवताओं को भी यहां पर्याप्त प्रमुखता दी गई है। यहां मंदिरों में न केवल युवा बल्कि बुजुर्ग तक भी पांडित्य एवं ओजपूर्ण स्वरों में रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करते हैं। यह अवश्य ही दर्शा देता है कि बीकानेर की संस्कृति अपने आप में कितनी समृध्द है। फिर सबसे अहम् बात यह कि शिवबाड़ी स्थित श्री लालेश्वर महादेव मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी संवित् सोमगिरीजी महाराज बीकानेर में निवास करते हैं और उनकी कृपा व आशीर्वाद से यह शहर फल-फूल रहा है। उधर तेरापंथ के प्रणेता आचार्य तुलसी ने बीकानेर में जो सामाजिक-धार्मिक चेतना जागृत की, वह आज विश्व भर में फैल चुकी है। अणुव्रत की अवधारणा ने जीवन का नया संदेश जैन धर्मावलंबियों ही नहीं बल्कि समूचे समाज को दिया है।
पाटा संस्कृति की मिसाल नहीं
पाटा संस्कृति को बीकानेर शहर की विरासत कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी और यह संस्कृति यहां के बाशिन्दों की समृध्द सोच और सभी तरह के विषयों में गहरी पकड़ को साबित करती है। पाटा के मायने है तख्ते और दिन में इन तख्तों पर जो चर्चाएं होती हैं उसमें नगर निगम बीकानेर के वार्ड या मोहल्ले से लेकर बराक ओबामा के पैकेज तक चर्चा की जाती है और उसमें भी बहस काफी मुखर मुकाम पर पहुंची हुई होती है। इस चर्चा में 18-20 वर्ष का युवा जहां भागीदार रहता है तो 80-90 वर्ष के बुजुर्ग भी उसी मुस्तैदी से इसमें भाग लेते हैं। जब होली के दिन आते हैं इन्हीं पाटों पर दिन ढलने के साथ ही रम्मत गायन की तैयारियां देखने को मिलती है और बीकानेर की रम्मतें यहां की उस मस्ती को उजागर करती है जो यहां के बाशिन्दों की रग-रग में समाहित है।
खाने के शौकीन
बीकानेर का आम और खास आदमी खाने का बड़ा शौकीन होता है। वहां के किसी भी परिवार का आप आतिथ्य ग्रहण करें, थाली में इतनी सारी वैरायटीयां आती हैं और वह भी इतने आग्रह के साथ कि आप मना नहीं कर सकते। यही वजह है कि बंगाल के रसगुल्ले ने बीकानेर के रसगुल्ले के रुप में अपनी अलग ब्रांड इमेज बना ली है और इस बंगाली मिठाई ने बीकानेरी रसगुल्ले के रुप में अपना एक अलग बाजार विकसित कर लिया है। बीकानेर शहर में स्थित मिठाईयों की दुकानों पर घूम जाएं, एक से एक दिलचस्प वैरायटी यहां के मिठाई-शोधकर्ताओं ने विकसित की है और उन मिठाईयों को देशव्यापी पहचान भी दिलाई है। बीकानेर के हल्दीराम समूह ने हल्दीराम ब्रांड नाम से रेस्तरां चैन खोली है, जो कि जयपुर से दिल्ली जाने वाले लोगों के लिए गुड़गांव में फूड का बड़ा सेंटर हो गया है बल्कि दिल्ली से वीक एंड पर इस फूड कम रेस्तरां चैन पर आने वाले लोगों की संख्या बताती है कि बीकानेर वालों का सोच कितना आगे चलता है। इसी तरह नमकीन और शरबत आदि में भी बीकानेर की अपनी वैरायटी है।
उद्यमिता का धनी
बीकानेर रेतीले इलाकों में फैला एक ऐसा शहर है जहां के उद्यमियों ने अपनी उद्यमिता की विश्वभर में मिसाल कायम की है। पापड़-भुजिया ने तो इस शहर का नाम विश्वभर में बीकाजी के शिवरतन अग्रवाल ऊर्फ फन्ना बाबू, भीखाराम चांदमल के हरि बाबू और रसना वाले गणेश बोथरा के नाम सबसे अधिक उल्लेखनीय हैं। यहां बना रसगुल्ला दिल्ली से लेकर देशभर के बाजारों में अपनी पहचान कायम किए हुए है। यहां के उद्यमी केवल पापड़-भुजिया या रसगुल्ले तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने अन्य क्षेत्रों में भी सफलता के नए मानदंड स्थापित किए हैं। इन दिग्गजों में मोहता परिवार और ढङ्ढा परिवार का तो अपना योगदान है ही, लेकिन साथ ही टीटी ब्रांड नाम से बनियान-अंडरवियर बनाने वाले रिखबचन्द जैन के औद्योगिक योगदान को कोई नहीं भूला सकता। यहां के टोडरमल ललवानी ऐसे ऑटोमोबाइल उत्पाद बनाते हैं जिनका उपयोग हीरो होंडा की मोटरसाइकिल में किया जाता है, तो नेमीचन्द खजांची पर्ल किंग के नाम से प्रख्यात रहे हैं जिनका जापान में बहुत बड़ा काम है। लालचंद कोठारी बीकानेर की वह शख्सियत है जिनका स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एण्ड जयपुर की स्थापना में उल्लेखनीय योगदान रहा है। विज्ञापन-मीडिया की दुनिया में के्रयांस समूह ने जो मिसाल कायम की है उसने भी बीकानेर का नाम भारतवर्ष में बडे मुकाम पर पहुंचाया है इसे प्रमोट किया कुणाल लालवानी ने। यहां के कारोबारी दिग्गजों ने तो कोलकाता में एक छोटा बीकानेर अलग बना रखा है, और खास बात यह है कि बीकानेर की लाईफ कोलकाता से जुड़ी हुई है, कोलकाता में कोई घटनाक्रम होता है तो उसकी सबसे पहले खबर बीकानेर आती है और कोलकाता में उसका फैलाव बाद में होता है। बीकानेर की उद्यमिता को यदि अवसर मिलता है तो वह अपनी पहचान कायम करने में नहीं चूकती। इसलिए कि यहां के पानी में ही उद्यमिता कूट-कूट कर भरी है। यहां का उद्यमी काम से कभी हार नहीं मानता और अपने काम को कैसे नया बनाए, कैसे आगे बढ़ाए यह सोच उसके दिल-दिमाग पर चलता रहता है। यही वजह है कि केवल मोठ की भुजिया बनाने वाले बीकानेर ने नमकीन में इतनी सारी वैरायटी इसी सोच के सहारे विकसित कर दी कि आज के दो दशक पूर्व तक कोई सोच भी नहीं सकता था। इस लाइन पर भीखाराम चांदमल और बीकाजी समूह ने जो काम किया है वह वास्तव में उल्लेखनीय कहा जा सकता है।
फिर भी….

Article by Kumar Ashish
बीकानेर की अपनी कुछ कमजोरियां भी हैं। यहां एक वर्ग ऐसा है जो भाग्यवादी है और ग्रह-चाल में उलझा रहता है। वह कभी शनि के वक्री होने की प्रतीक्षा करता है तो कभी गुरु के मार्गी होने की। इसके अलावा बीकानेर में समय काटने के इच्छुक कारोबारी तबके के पास सट्टा भी एक बहुत बड़ा काम है। यहां मौसम के सट्टे से लेकर चुनावी सट्टे का बड़ा गणित परिचालित होता है। इतना ही नहीं कमोडिटी वायदा कारोबार को प्रारम्भिक दौर में सबसे अधिक रेस्पांस भी बीकानेर से ही मिला था। यहां से चले ग्वार के सट्टे ने वायदा बाजार में लंबे समय तक रौनक बनाए रखी थी। यहां के ग्वार वायदा कारोबारियों ने तो देशभर में अपनी अलग पहचान बना ली थी। ऐसे ही एक कारोबारी अब जयपुर, दिल्ली या चैन्नई जाया करते थे, तो लोग उनसे मिलने के तलबगार रहते थे और आगे की तेजी मंदी के मैसेज की फिराक में रहते थे। इस तरह बीकानेर कामयाबी की ऊंचाईयों पर पहुंचे हुए लोगों का शहर है। इस शहर ने अभिनेता धर्मेन्द्र सरीखी शख्सियत को गले लगाया और संसद के गलियारों तक उन्हें पहुंचाया। उसके बाद क्या रहा बताने की जरुरत नहीं। इस शहर की अपनी एक अलग फितरत है, यही वजह है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो बी. डी. कल्ला सरीखी शख्सियत चुनाव हार बैठी। फिर भी इस रंग-रंगीले शहर का आलम सबसे अनूठा और सबसे दिलचस्प है।
- कुमार आशीष {मो.: +91-9829000091}

Artical Kumar Ashish
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May 20th, 2009 at 9:13 AM
GOOD……….
May 21st, 2009 at 7:12 AM
again a wonderful piece of work by writer….
June 18th, 2009 at 3:29 PM
very well written….
I love my bikaner
June 20th, 2009 at 9:21 AM
nice article
July 24th, 2009 at 12:54 PM
Hi Bikaner ke Dosto,
Kya hal hain. Mere Dost jo Bikaner me hain. Mujse Gussa hain.
Mujse Usse Sorry Khna hain.
Sorry Dear. Please call me
Please…Please….Please……
October 25th, 2009 at 8:51 PM
abhi main LIBYA me hun.but i never forget MY BIKANER,jisne mujhe sub kuchh diya,JAI MAA KARNI
KOI NAHI BIKANER JAISA
December 9th, 2009 at 2:29 PM
Bhut aacha likhne ke liye dhanyvad.
Thanks
G RAJ JOSHI
9314106174
BIKANER
December 29th, 2009 at 9:41 AM
Nice article. Keeep it up and do write more about Bikaneri culture and Bikaner.
December 29th, 2009 at 9:56 AM
‘EAST OR WEST MY BIKANA IS THE BEST’ I think good article by Dear Kumar aashish……….
January 3rd, 2010 at 7:00 PM
Dear Aashish………
Bahut Achchha Likha hai….
Kya kahna Apne Bikaner Ka….!!!
February 5th, 2010 at 1:14 AM
love you bikaner
March 4th, 2010 at 1:14 PM
Hello love for at bikaner
April 3rd, 2010 at 11:04 AM
Namskar
it is a good artical
bikaner ke baare me jankari dene ke lia
thanxxxxxxx
Subhash goyal Nimawali
Sri Ganganagar rajasthan
Mobile. 9462894494
May 1st, 2010 at 7:07 PM
Wonderful Bikana
May 1st, 2010 at 7:10 PM
Best City of India
Very Nice and Good Culture People
Thanx Bikaner
May 8th, 2010 at 11:29 PM
MERI SHAN HEIN BIKANER.
July 24th, 2010 at 3:28 PM
Hi,”
I want to like for the life and all wage…….
I like my best city Bikaner and Nokha,
All village and Nagger for good intention and wonderful
Hello my friends, me jaldi hi aahuga bikaner me
Regards,
Arjun Luhar
CHD engg. & Drte..