Posted on 02 February 2010 by Vinay N. Joshi
बीकानेर, 2 फरवरी। बीकानेर की औद्योगिक विकास हेतू घोषित योजनाओं को साकार रुप देने की मांग को लेकर बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष डी पी पचीसिया ने राजस्थान के उद्योग मंत्री राजेन्द्र पारीक को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि पिछले 3-4 वर्ष की अवधि में बीकानेर को ढेरों नई योजनाओं की सौगात मिली है, लेकिन घोषणा के बाद यह अब भी फाईलों में दबी पड़ी है। कंटेनर डिपो, कलस्टर निर्माण जैसी योजनाएं अभी सरकारी महकमों से बाहर नहीं निकली है। एग्रो फूड पार्क, टैक्सटाइल पार्क और फूड लैब योजनाएं भी घोषणा के बाद अमलीजामा पहनने का इंतजार कर रही हैं। पचीसिया ने लिखा कि बीकानेर जिला भुजिया, पापड़, बड़ी, दलहन, रसगुल्ला व्यवसाय के लिए अपनी खास पहचान रखता है। यहां बनने वाली भुजिया विदेशों में भी अपनी पहचान रखती है। इन उत्पादों का टर्न ओवर प्रति वर्ष 99 हजार टन से अधिक होने के बावजूद यहां पर फूड लैब की कमी आज भी बरकरार है।

D P Pachisia
व्यापारी/उद्यमी काफी लम्बे समय से जिले में फूड लैब स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की 11 वीं पंचवर्षीय योजना में बीकानेर के नापासर में प्रस्तावित टैक्सटाइल पार्क आज तक मूर्त रुप नहीं ले सका है। पार्क की घोषणा हुए आज एक साल से अधिक हो चुका है, मगर अभी तक इस पार्क के लिए एस.पी.वी. का निर्माण तक नहीं हुआ है। सरकार द्वारा इस पार्क के लिए नापासर में स्थान भी निर्धारित कर लिया गया है। किन्तु व्यापारियों द्वारा प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी नहीं बनने से यह पार्क विभागों की फाईलों में ही दबा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की एकीकृत वस्त्र पार्क की योजना के तहत इस पार्क के लिए 50 एककों की एक कम्पनी का गठन करना अनिवार्य है, जो इस पार्क के लिए भूमि की खरीद करेगी। इस आर्थिक मंदी के चलते सरकार द्वारा जमीन की खरीद कर वहां मुलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं ताकि व्यापारी उसमें आसानी से निवेश कर सकें। कलस्टर निर्माण योजना के बारे में पचीसिया ने लिखा कि भारत सरकार की ओर से माइक्रो एवं लघु उद्यम कलस्टर विकास कार्यक्रम के तहत बीकानेर में तीन कलस्टरों सिरेमिक, वूलन यार्न व जैम्स एण्ड वैलरी के कलस्टरों की स्वीकृति दी गई है। इनकी डायग्नोस्टिक स्टडी की मंजूरी मिले आज माह से यादा का समय बीत गया, लेकिन इस पर आशाजनक प्रगति नहीं हो पायी। तीनों कलस्टरों की डायग्नोस्टिक स्टडी एक स्वतंत्र एजेन्सी को दी गई है जिसने अभी तक अपना काम शुरु नहीं किया है। इसी कारण जिले में बनने वाले कलस्टरों का निर्माण अटका हुआ है। स्टडी के लिए एजेन्सी प्रत्येक कलस्टर की डायग्नोस्टिक स्टडी के लिए 2 लाख 50 हजार रुपए लेगी, जिसका 10 प्रतिशत व्यापारियों को वहन करेगा। एम.एस.ई.डी.पी. योजना के तहत कलस्टर की परियोजना लागत 10 करोड़ रुपए है, जिसमें 80 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता केन्द्र सरकार द्वारा दी जाती है।
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