युवाओं को उद्यमिता के सांचे में ढालकर करें सुदृढ़ भारत निर्माण : डा. कल्ला / ईसीबी में उधमिता विकास का जयघोष

Posted by Vinay N. Joshi on October 18th, 2010

Dr B D Kalla Adressing Fdp Programme in Bikaner Engineering College.

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बीकानेर, 18 अक्टूबर। बीकानेर, 18 अक्टूबर। केन्द्रिय विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद एवं अभियांत्रिकी महाविधालय बीकानेर के नवाचार एवं उद्यमिता विकास केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में उद्यमिता विकास पर तेरह दिवसीय फेकल्टि डवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारभ राजस्थान के पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। डा. कल्ला ने इस मौके कहा कि आज विश्व में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसमें सबसे ज्यादा युवा है इसलिए उच्च शिक्षण संस्थाओं को चाहिए कि वो इनको उधमिता के सांचे में ढालकर सुदृढ भारत का निर्माण करे।
Report By Journalist Rajeev Joshi

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डॉ कल्ला ने विदेशी व्यापार में उधमियों की भूमिका पर बोलते हुए कहा कि आज देश का भुगतान संतुलन एवं व्यापार संतुलन की साम्य अवस्था के अभाव में महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा के संकट से जूझ रहा है। आज हमारा देश कच्चे माल एवं प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से सम्मुन्नत है लेकिन अंतिम उत्पाद नहीं बना पाने की वजह से हम अपने ही कच्चे माल को तैयार माल के रुप में क्रय करने को मजबूर है। उन्होंने यह भी कहा कि हम बाजार में तभी कायम रह पायेंगे जब हम संसार में हो रहे परिवर्तनों को पहचान कर उसके अनुरुप स्वयं में एवं उत्पाद में परिवर्तन कर पायेंगे। डॉ कल्ला ने कई विदेशी शिक्षण संस्थाओं के उदाहरण देते हुए अभियांत्रिकी महाविधालय बीकानेर को कुछ टिप्स बताये कि वो किस प्रकार अपनी सेवाओं का विस्तार कर उधमिता की नयी मिसाल कायम कर सकती है। पूर्व काबिना मंत्री ने केन्द्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज केन्द्र सरकार उधमिता विकास के लिए बहुत बडी धन राशि खर्च कर लोगों को विकसित करने का प्रयास कर रही है। कार्यक्रम के संरक्षक इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य प्रो एम.पी.पूनिया ने कहा कि देश तभी विकसित हो सकता है जब वो नौकरी करने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बने। उन्होंने शिक्षको को अपनी सोच बदलने की पूरजोर मांग करते हुए कहा कि हम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए उत्तरदायी है। डा पूनिया ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष 1400 इंजीनियरिंग महाविद्यालयों से तकरीबन 441000 तकनकी स्नातक तैयार होते है। यदि सरकार, रिसर्च संस्थान, विवि एवं महाविद्यालय स्तर पर एक संयुक्त व्यूह रचना बनाकर कार्य किया जाये तो हम विश्व के सर्वोत्तम तकनीक आधारित उद्योगों की स्थापना कर सकते है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं टैक्नोलॉजी के प्राचार्य प्रो. आर. सी. गौड़ ने कहा कि आज का समय आराम से जीवन यापन का नहीं है क्योंकि आर्थिक दावानल सभी अर्थव्यवस्थाओं की कमर तोड रहा है लेकिन एक सच्चा उधमी ही इस परिस्थिति से उबार पाने का सार्मथ्य रखता है। कार्यक्रम के संयोजक डा. गिरिराज किराडू ने कहा कि उधमिता विकास के सबसे बडे प्रणेता भगवान श्री कृष्ण है जिन्होंने श्रीमदभगवत गीता में अर्जुन को बार बार उधमी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज बड़ी-बड़ी कम्पनियां मन लुभावन वेतन पैकेज दे रही है जिससे प्रतिभावान युवा पीढी का नौकरी की तरफ आकर्षित हो जाना सामान्य सी घटना है लेकिन यह किसी भी दृष्टिकोण से देश के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका एवं कुछ यूरोपियन देशों में इन्टरप्रिनियोरसिप का चलन हो गया है जिसमें किसी संगठन या संस्था में कार्य करने वाले लोग कुछ साल नौकरी करके अपने अनुभव का फायदा उठाकर नये विचारों एवं सृजनात्मक शक्ति का प्रयोग कर नये व्यवसायों की स्थापना कर रहे है। डॉ गिरिराज ने कहा कि भूमि, पूंजी, मशीन एवं आदमी उत्पादन के घटक मान गए है जिसमें आदमी अर्थात् उद्यमी ही वह व्यक्ति होता है जो इन तीनो संसाधनों का नियोजन करता है, संगठित करता है एवं इनका अनुकूलतम प्रयोग कर न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन द्वारा न्यायोचित्त लाभ का सृजन करता है। डॉ गिरिराज ने उधमिता के विचार को विश्लेषित करते हुए बताया कि सूम्पिटर, मैक्केलेंड, हेगन, वेबर एवं यूथ आदि दक्ष वि6ोषाज्ञों ने उधमिता को अलग अलग ढंग से परिभाषित किया है लेकिन ये सभी विचार अंतत: एक बात पर सहमत है कि आदमी और उसका व्यक्तित्व ही उधमिता के केन्द्र बिन्दू होते है जो कि सघन प्रशिक्षण द्वारा संभव है । डॉ गिरिराज ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि उधमी पैदा नहीं होते वरन उनको प्रशिक्षण द्वारा तैयार किया जाता है। कार्यक्रम के प्रथम दिन श्रीजैन पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो टीके जैन ने दो सत्रों के माध्यम से उधमिता विकास के तत्वों एवं विचार को विस्तार से परिभाषित किया। अपने धन्यवाद उद्बोधन में डॉ गिरिराज ने भारतीय उधमिता विकास संस्थान के डीएसटी निमेट प्रोजेक्ट के नेशनल कोर्डिनेटर एस बी सरीन के साथ साथ महाविद्यालय प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डॉ सौकत अली ने धन्यवाद भाषण दिया । कार्यक्रम का संचालन डा. श्रध्दा परमार ध्दारा किया गया।
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