सफल जीवन का सच्चा मंत्र है नौकरी लेने से ज़्यादा देने वाले बनें : डॉ संजय बी. चोरडिया – Chhotikashi.com

सफल जीवन का सच्चा मंत्र है नौकरी लेने से ज़्यादा देने वाले बनें : डॉ संजय बी. चोरडिया

        भविष्याभिमुख एवं नैतिक फ़ार्मासिस्ट तैयार करने का सूर्यदत्त कॉलेज ऑफ़ फ़ार्मेसी का संकल्प साथ ही जीवन कौशल, ईमानदारी और सकारात्मकता पर विशेष बल       पुणे। फ़ार्मेसी क्षेत्र तेज़ी से बदल रहा है। आधुनिक कौशल के साथ ईमानदारी और निरंतर सीखने की वृत्ति अपनाई, तो बड़ी से बड़ी ऊँचाइयाँ हासिल की जा सकती हैं। नौकरी मिलना पहला कदम है, लेकिन समाज को मूल्य देने वाले, उद्यमिता का सपना देखने वाले और अवसर निर्माण करने वाले विद्यार्थी तैयार करना ही सूर्यदत्त का उद्देश्य है। फ़ार्मासिस्ट के रूप में आपका ज्ञान समाज के लिए कितना उपयोगी है, यही आपकी असली सफलता तय करेगा। इसलिए नौकरी लेने से अधिक देने वाले बनें, यही सफल जीवन का सच्चा मंत्र है। यह वक्तव्य प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने सूर्यदत्त फ़ार्मेसी इंडक्शन के कार्यक्रम में व्यक्त किए। वे यहां सूर्यदत्त कॉलेज ऑफ़ फ़ार्मेसी, हेल्थकेयर एंड रिसर्च (एससीपीएचआर) की ओर से बी.फार्म और डी.फार्म में नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम में बोल रहे थे। शैक्षणिक वर्ष 2025–26 हेतु आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्थान की कार्यप्रणाली, नियमावली, शैक्षणिक नीतियाँ, व्यावसायिक नैतिकता, उद्योग की अपेक्षाएँ और फ़ार्मेसी क्षेत्र में उभरते अवसरों के बारे में व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करना था। उन्होंने बताया कि आज फ़ार्मेसी क्षेत्र तीव्र गति से बदल रहा है और पीसीआई के नए पाठ्यक्रम में क्लिनिकल फ़ार्मेसी, एआई आधारित हेल्थकेयर, डिजिटल लैब्स जैसे आधुनिक कौशल शामिल हो रहे हैं। सूर्यदत्त में हम न केवल यह प्रगति सिखाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों में ‘नैतिक फ़ार्मासिस्ट’ बनने की मूल्य व्यवस्था भी विकसित करते हैं। नवाचार, सकारात्मकता, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के आधार पर ही विद्यार्थी भविष्याभिमुख और जिम्मेदार फ़ार्मासिस्ट बन सकते हैं। इस दौरान सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के संस्थापक अध्यक्ष डॉ चोरडिया ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए जीवन-कौशल पर अत्यंत प्रेरणादायी मार्गदर्शन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अपने ऊपर दृढ़ विश्वास रखें, अच्छी संगत चुनें, निरंतर गुणवत्तापूर्ण ज्ञान प्राप्त करें और उसे दूसरों के साथ साझा करें। बुरी आदतों से दूर रहें तथा हमेशा स्वयं से और अपने माता-पिता से ईमानदार रहें। डॉ. चोरडिया बोले, निरंतरता, ईमानदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण ही विद्यार्थियों की सर्वांगीण प्रगति के प्रमुख आधार हैं। एफडीए , पुणे के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त तथा औषध निरीक्षक दिनेश खिनवसरा ने फ़ार्मेसी क्षेत्र की व्यापकता, नियामक विभाग की भूमिका, गुणवत्ता मानक तथा औषधि नियमन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर इन्स्टिट्यूट ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के मानद संचालक डॉ. महेश बुरांडे, पुणे केमिस्ट असोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी व पुणे एफएमसीजी डीलर्स असोसिएशन के अध्यक्ष प्रसन्न पाटिल, एसएलओ ग्लोबल बिजनेस कम्यूनिटी के संस्थापक, मार्गदर्शक, प्रशिक्षक डॉ. दीपक तोष्णीवाल आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित विद्यार्थियों ने भी पूर्ण आत्मविश्वास से उत्साहपूर्वक भावना व्यक्त करते हुए एक स्वर गुंजायमान किया कि हमारी 2025–2029 की बैच सर्वश्रेष्ठ साबित होगी। हमारी बैच आने वाली बैचों के लिए एक आदर्श बनेगी। संपूर्ण कार्यक्रम का उत्कृष्ट आयोजन एवं समन्वय प्रो. सारिका झांबड ने किया, जबकि दिपाली कुडले, अंकिता सरोदे और मोहिनी तहरे ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।


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