बुराईयों व कुसंस्कारों का त्याग कर धर्म आराधना में लगें : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

बुराईयों व कुसंस्कारों का त्याग कर धर्म आराधना में लगें : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

–कृष्णगिरी शक्तिपीठ में देवी भागवत कथा–यज्ञ महोत्सव में सर्वधर्म दिवाकरजी ने अवचेतन मन को विस्तार से किया परिभाषित 

–राष्ट्रसंतश्रीजी ने बच्चों में संस्कार डालने, सर्वोत्तम बनाने की दी प्रेरणादाई सीख 

कृष्णगिरी। कृष्णगिरी शक्तिपीठाधिपति, राष्ट्रसंत, आध्यात्म योगी, वचन सिद्ध परम् पूज्य गुरुदेवश्रीजी डॉ. वसंतविजयजी म.सा ने सोमवार को कहा कि जीवन में बुराईयों व कुसंस्कारों का त्याग कर धर्म आराधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देव, गुरु, धर्म के प्रति विश्वास, श्रद्धा व समर्पण भाव रखेंगे तभी जीवन उज्जवल होगा और सही दिशा व मार्ग मिलेगा। मनुष्य को गुरु व सद्गुरु की सही परख कर जीवन में फैमिली सद्गुरु बनाना चाहिए। श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थधाम कृष्णगिरी में श्रावण मास विशेष 29 दिवसीय दिव्य भक्ति–आराधना व यज्ञ महोत्सव के 18वें दिन श्रीमद् देवी भागवत कथा महापुराण के दौरान अपने अमृतमई प्रवचन में मां पद्मावती के परम् उपासक, सिद्धसाधक,  यतिवर्य, डॉ. वसंतविजयजी म.सा. बोले कि व्यक्ति वाणी का श्रवण, स्मरण, मनन व चिंतन करते हुए समर्पण से अपने जीवन की शक्तियों को उजागर करे साथ ही परमात्मा की वाणी को अपने जीवन आचरण में उतारे। प्रसंगवश अनेक उदाहरणों के साथ उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे बचपन से ही बच्चों में संस्कार डालें और उसे सर्वगुण सम्पन्न की तरह सर्वोत्तम बनाते हुए उसके आने वाले भविष्य का मार्ग तय करें। यदि संस्कार डालने की यह प्रवृत्ति बचपन में ही माता-पिता अपने बच्चों को डाल देंगे तो निश्चित ही वह 'कोहिनूर' बनेगा। इसके अलावा प्रकृति के लय–ताल से जुड़ने की सीख देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए बच्चे के साथ-साथ घर को संस्कारों का स्थान बनाएं। भारतीय संस्कारों को अपने में शामिल करते हुए अपने समान बच्चों को बनाएं और आने वाली पीढ़ी को सकारात्मक भाव में सुधारें। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिखाएं कि वे बुराई से दूरी बनाते हुए अच्छाई से जुड़ें तभी आपके द्वारा दिए संस्कार उसे बेहतर जीवन का मार्ग प्रशस्त करेंगे। विद्यासागर संतश्रीजी पूज्य गुरुदेव ने अवचेतन मन को विस्तार से परिभाषित किया तथा इस दौरान ईस्ट मुद्रा की जानकारी भी उपस्थित श्रद्धालुओं को दी। डॉक्टर संकेश छाजेड़ ने बताया कि मंगलवार, 2 अगस्त को नाग पंचमी के अवसर पर चमत्कारी नाग देवता, श्री धरनेंद्रदेव एवं देवी मां पद्मावतीजी का दुग्ध अभिषेक, पंचामृत अभिषेक–पूजन 10 बजे से होगा तथा इसके बाद अलौकिक 1008 प्रकार के व्यंजन, नैवेद्य भोग अर्पण किए जाएंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पूज्य गुरुदेव के अधिकृत वेरीफाइड यूट्यूब चैनल थॉट योगा से लाइव किया गया।

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