अवगुण विकार मिटाएं, संस्कार व चरित्र सुधारें : राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा.

अवगुण विकार मिटाएं, संस्कार व चरित्र सुधारें : राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा.

विद्यासागर संतश्रीजी बोले, सदाचारी बनें, मां पद्मावती स्वयं हाथ थाम लेगी 

कृष्णगिरी तीर्थ में 12 अगस्त को आयोजन की पूर्णाहुति व रक्षाबंधन पर्व पर 108 बहनें भाइयों को बांधेगी चांदी की राखी

श्रद्धालु भक्तों को पूज्य गुरुदेव ने प्रदान की मनोवांछित पूर्ण सिद्धि मंजूषा

कृष्णगिरी। श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठाधीपति, राष्ट्रसंत, आध्यात्म योगी परम पूज्य गुरुदेव श्रीजी डॉ वसंतविजयजी महाराज साहेब ने शनिवार को यहां श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में भूलोक के प्रसंग का वर्णन किया। इससे पूर्व श्री पार्श्वप्रभु के मोक्ष कल्याणक दिवस की रात्रि में दीपोत्सव भक्ति आराधना के तहत पूज्य गुरुदेवश्रीजी ने मनोवांछित पूर्ण सिद्धि मंजूषा श्रद्धालु भक्तों को प्रदान की। श्रावण मास विशेष 29 दिवसीय ज्ञान, भक्ति, आराधना एवं यज्ञ महोत्सव के तहत उन्होंने अपने अमृतमयी प्रवचन में शनिवार को 23वें दिन कहा कि कथाओं का प्रयोजन ही यही है कि व्यक्ति का जीवन परिवर्तित हो, श्रद्धालु श्रद्धावान बनकर श्रेष्ठ बने। प्रकृति से दूर हो रहे मानव समाज को पशु–पक्षियों के सटीक उदाहरण के साथ राष्ट्रसंत श्रीजी ने कहा कि दुख, तकलीफों हो और चिंताओं से ग्रस्त इंसान की मुश्किलों की वजह उसका प्रकृति के साथ असंतुलन भरा दूर दुर्व्यवहार है। उन्होंने कहा कि परमात्मा की वाणी एवं शास्त्र कहते हैं सद्गुण, सदाचार एवं शाकाहार के साथ प्राकृतिक जीवन जीएं, निश्चित ही विवेक युक्त प्रज्ञा आएगी। यही नहीं भविष्य की घटनाओं की जानकारी भी अपने अवचेतन मन को प्राप्त होने लगेगी। व्यक्ति को अपने जीवन में अवगुणों एवं विकारों को मिटाने की प्रेरणादायी सीख देते हुए डॉ वसंतविजयजी महाराज साहेब ने कहा कि क्रोध, निंदा, झूठ व बुराइयों को त्यागें, सदाचारी बनें। देवी मां पद्मावती भी सदाचार के लिए तरसती है। उन्होंने कहा कि विकारों को समाप्त कर सर्वोत्तम बनें तथा संस्कार व चरित्र सुधारें तभी कृष्णगिरी आना व कथा श्रवण करना सार्थक होगा। वे बोले तन, मन से श्रेष्ठ व्यक्ति का मां पद्मावती स्वयं हाथ थाम लेती है, फिर उसके जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रह सकती। इस अवसर पर मां पद्मावती एवं पूज्य गुरुदेव के विभिन्न चमत्कारी प्रसंगों क्रमशः बेंगलूरु की सुरभि जैन व सीकर की सुश्री ममता भट्ट सहित अनेक लोगों के अनुभवों का उल्लेख संचालक विनोद आचार्य ने किया। देशभर से पार्सल कोरियर के माध्यम से प्रतिदिन प्राप्त हो रही हवन यज्ञ में उपयोग के लिए मेवे व यज्ञ सामग्री का विवरण भी बताया गया। डॉक्टर संकेश छाजेड़ ने बताया कि आगामी 12 अगस्त को देवी भागवत कथा एवं यज्ञ महोत्सव की पूर्णाहुति विराम एवं रक्षाबंधन पर्व भी हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस दौरान तीर्थ धाम में 108 भाई-बहन के जोड़ों को 5 ग्राम चांदी की राखी, उपहार व देवी मां का प्रसाद शक्तिपीठ की ओर से प्रदान किया जाएगा। इसी दिन देवी मां पद्मावती के श्रीचरणों में एक हजार आठ प्रकार के व्यंजन भोग अर्पण किए जाएंगे। आयोजन में सर्वधर्म समाज के देश और दुनिया के बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से यूट्यूब चैनल थॉट योगा पर लाइव प्रसारित किया जा रहा है।

पूज्य गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को प्रदान की मनोवांछित पूर्ण सिद्धि मंजूषा..

राष्ट्रसंत पूज्य गुरुदेव डॉ वसंतविजयजी महाराज साहब ने कृष्णगिरी तीर्थ में आगंतुक समस्त श्रद्धालुओं पर अपनी असीम कृपा बरसाते हुए मां पद्मावती के प्रिय शुक्रवार, श्रावण मास की अष्टमी तिथि, वरलक्ष्मी पर्व एवं पार्श्व प्रभु के मोक्ष कल्याणक दिवस की रात्रि में दीपोत्सव भक्ति आराधना कराई। साथ ही इस दौरान सभी श्रद्धालु भक्तों को मनोवांछित पूर्ण सिद्धि मंजूषा प्रदान की। जिससे सभी की मनोकामनाएं चमत्कारिक रूप से नियत समय में अवश्य पूर्ण होगी। इस दौरान संगीतमय भक्ति में विद्यासागर संतश्रीजी ने संकेश्वर पार्श्वनाथ भगवान एवं मां पद्मावतीजी की महिमा प्रस्तुत की। साथ ही जिसने भी सच्चे मन से मां को याद किया है.., भक्ति रस में है शक्ति बड़ी.., मैंने झोली फैला दी ओ मैया.., भगत के वश में है भगवान.., जा रे जा पंछी मां के धाम.. सरीखे अनेक भक्ति की पराकाष्ठा के प्रसंगों की संगीतबद्ध किया व भक्तों की तालियों की गूंज के साथ झूमने पर मजबूर किया।

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