गुरु की दृष्टि अयोग्य व्यक्ति को भी योग्य बना देती है : डॉ वसंतविजयजी म.सा.

गुरु की दृष्टि अयोग्य व्यक्ति को भी योग्य बना देती है : डॉ वसंतविजयजी म.सा.

कृष्णगिरी तीर्थ धाम में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का वाचन एवं महायज्ञ विधान जारी

कृष्णगिरी। श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थ धाम कृष्णगिरी के शक्ति पीठाधीपति, राष्ट्रसंत, सर्वधर्म दिवाकर, परम पूज्य गुरुदेवश्रीजी डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने बुधवार को यहां कहा कि जिस प्रकार दीप से दीप जल सकता है उसी प्रकार गुरु से ही गुरु कृपा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि गुरु की दृष्टि अयोग्य व्यक्ति को भी योग्य बना देती है। इंसान ही नहीं, देवों तक की कृपा गुरु के माध्यम से ही मिल सकती है। गुरु को एक अवस्था बताते हुए राष्ट्रसंतश्रीजी ने कहा कि उस अवस्था में श्रद्धालु-भक्त का पहुंचना जरूरी है। रेवती नक्षत्र एवं बुधाष्टमी दिवस विशेष को की गई पूजा, भक्ति व आराधना को अनन्त गुणा फलदायी बताते हुए अपने प्रेरणादायी प्रवचन में उन्होंने कहा कि संसार के विभिन्न विपत्तियां, रोग जो भी है सभी से मुक्ति का उपाय देवी भागवत कथा के श्रवण में है। संतश्रीजी ने देवी भागवत में तीसरे स्कंध के सातवें अध्याय में गुणों का व्याख्यान से प्रारंभ कर मां के दिव्य गुणों को विस्तार से बताया। सांसारिक व्यक्ति के जीवन में विभिन्न ग्रहों के विभिन्न दोष एवं निवारण के सटीक, चमत्कारी उपाय बताते हुए पूज्य गुरुदेवश्रीजी ने कहा कि प्रभु के समक्ष सदैव प्रार्थना करनी चाहिए, प्रार्थना के भाव से की गई विनती हमेशा इच्छित वस्तु अवश्य दिलाती है। उन्होंने कहा कि स्वभाव बदलेगा तो परिणाम भी बदलेगा। पूज्य गुरुदेव यह भी बोले कि किसी व्यक्ति के दुख हजार हो सकते हैं मगर देवीकृपा में दस हजार उपाय है, जिससे वह सुख, समृद्धि प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा, मां के चरण त्रिदेवों के लिए भी दुर्लभ है, मगर भक्तों के लिए सदैव सुलभ रहे हैं। साधना के शिखर पुरुष डॉ वसंतविजयजी म.सा. ने दुर्लभ पांचजन्य मुद्रा अभ्यास से कुलदेवी की कृपा से भी अवगत कराया। डॉ संकेश छाजेड़ ने बताया कि देवी कथा महापुराण पश्चात श्री भैरव–पद्मावती महायज्ञ में आहुतियां दी गई। उन्होंने बताया कि आगामी 2 अगस्त को तीर्थ धाम परिसर में नाग पंचमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।

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