क्षमता और योग्यता के अनुसार ही अवसर देती हैं मां पद्मावती : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

क्षमता और योग्यता के अनुसार ही अवसर देती हैं मां पद्मावती : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

कृष्णगिरी शक्तिपीठाधीपति बोले, ज्ञानियों को याद करें ; ज्ञान, गुण व संस्कार उन्हीं से आएगा

पार्श्वप्रभू के मोक्ष कल्याणक महोत्सव को रथ यात्रा व 2895 लड्डुओं के भोग अर्पण से मनाएंगे आज 

कृष्णगिरी। जो पूरे संसार को नियंत्रण में रखती है, नि:स्वार्थता की प्रतीक है, ओर तो ओर वह हर जगह मौजूद है और एकमात्र वही सुख देने वाली है वह है श्रीआदिशक्ति जगतजननी राज राजेश्वरी देवी मां पद्मावती। जो उसे नहीं समझते वे दु:ख में डूबे रहते हैं और जो उसे अनुभव कर लेते हैं, मुक्ति, सुख एवं समृद्धि तथा आरोग्य को पाते हैं। कृष्णगिरि शक्तिपीठाधिपति, राष्ट्रसंत, यतिवर्य, परम् पूज्य गुरुदेव श्रीजी डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने गुरुवार को अपने नियमित अमृतमयी प्रवचन में यह बात कही। श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थधाम में 29 दिवसीय भक्ति–आराधना के तहत श्रीमद् देवी भागवत कथा महापुराण में उन्होंने कहा कि व्यक्ति की क्षमता और योग्यता के अनुसार मां अवसर देती रहती है, सही समय पर ममतामयी मां को पहचान लेना चाहिए और उसकी भक्ति में लग जाना चाहिए। उन्होंने मां की अनंतानंत महिमा को विस्तार से परिभाषित करते हुए कहा कि यह सारा संसार एक मात्र मां से पूर्णत: आच्छादित और नियंत्रित है, इसलिए कभी भी अन्याय से किसी के धन की प्राप्ति की इच्छा नहीं करनी चाहिए अपितु न्यायपूर्ण आचरण द्वारा देवी मां के आनंद को प्राप्त करना चाहिए। पूज्य गुरुदेवश्री बोले, दुनिया गिरे हुए व्यक्ति को ठोकर मारती है, लेकिन मां के शरणागत आने वाले को वह गोद में उठा लेती है। उन्होंने कहा ज्ञानियों को याद करें, ज्ञान, गुण व संस्कार उन्हीं से आता है।
डॉ वसंतविजयजी म.सा. ने कहा कि भगवान को पाने का सबसे सरल मार्ग है, भगवान को निष्काम भाव से प्रेम करो।
संयम एवं कर्त्तव्य पालन करते हुए अपने सत्कर्म से श्रेष्ठ बनने, सेवाएं देकर पुण्य अर्जित करने की प्रेरणादायी सीख देते हुए उन्होंने कहा कि जब हम पूरी तरह से तन्मय होकर अपनी शांति और पवित्रता की रक्षा करते रहेंगे तो निश्चित एक न एक दिन मां एवं सदगुरु दर्शन जरुर देंगे। प्रसंगवश ऋषि विश्वामित्र एवं वशिष्ठजी के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने सत्संग एवं गुरु के वचनों के श्रवण को ज्ञान एवं शक्ति की तरंग बताया। उन्होंने कहा कि कथा वाचन में संत की आवाज के माध्यम से अद्भुत ऊर्जा की तरंगे प्रवाहित होती है। इस दौरान मंत्र शिरोमणि संतश्रीजी ने ईष्ट जागृति मुद्रा की जानकारी दी। कृष्णगिरी के गुरुभक्त सागरमल अरविंद मनीष कुमार सोनी परिवार की ओर से देवी भागवतजी की आरती की गई एवं हवन यज्ञ का लाभ लिया गया। चिदंबरम के 11 विद्वान पंडितों द्वारा सर्वधर्म दिवाकर डॉ वसंतविजयजी महाराज साहब के सान्निध्य में हवन–यज्ञ में आहुतियां दी गई। कार्यक्रम में संतश्री वज्रतिलकजी आदि ठाणा–दो सहित देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण मौजूद रहे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पूज्य गुरुदेव के अधिकृत वेरीफाइड यूट्यूब चैनल थॉट योगा से लाइव किया गया। डॉक्टर संकेश छाजेड़ ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथजी के मोक्ष कल्याणक दिवस पर रथ यात्रा निकाली जाएगी एवं उन्हें पार्श्व प्रभु को 2895 लड्डुओं का विशेष भोग भी अर्पण किया जाएगा।

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