सर्वोत्तम बनने के लिए शुद्धता व व्यवस्थित जीवन शैली आवश्यक : डॉ वसंतविजयजी म.सा.

सर्वोत्तम बनने के लिए शुद्धता व व्यवस्थित जीवन शैली आवश्यक : डॉ वसंतविजयजी म.सा.

–कृष्णगिरी में पूज्य गुरुदेव श्रीमद् देवीभागवत कथा में सोमवार को नवरात्रि स्थापना महिमा प्रसंग का करेंगे उल्लेख

–दो अगस्त को नाग पंचमी पर होगा नाग देवता का पंचामृत अभिषेक एवं 1008 प्रकार के नैवेद्य भोग का अर्पण

कृष्णगिरी। श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम कृष्णगिरी (तमिलनाडु) के शक्तिपीठाधिपति, राष्ट्रसंत, सर्वधर्म दिवाकर परम पूज्य गुरुदेव श्रीजी डॉ वसंत विजय जी महाराज साहेब ने रविवार को यहां श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में अयोध्या के राजा ध्रुवसंधि व उनके पुत्र सुदर्शन, शत्रुजीत एवं भारद्वाज ऋषि के प्रसंग का विस्तार से उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने अपनी अमृतवाणी में कहा कि व्यक्ति के जीवन में पाप दुखों को ही नहीं खींचता है, बल्कि सुखों को भी रोकता है। जीवन में यदि दृढ़ता हो तो पहाड़ रूपी समस्या को चूर–चूर किया जा सकता है और खाई को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक श्रद्धावान व्यक्ति के लिए भूखे रहकर व्रत की सार्थकता है, उसी प्रकार रात्रि में नींद त्याग कर परमात्मा की भक्ति रूपी जागरण की विशेष महत्ता है। संतश्रीजी ने कहा कि व्यक्ति को सदैव ऊंचे लोगों से संबंध बनाने चाहिए। मित्रता से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने भगवान श्री कृष्ण व अर्जुन की जैसी मित्रता रखने की सीख दी। इस दौरान घर–परिवार, समाज में समृद्धि की वृद्धि के लिए सिमिलेरिटी साइंस एवं बटरफ्लाई इफेक्ट पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनीति से कमाए हुए धन का अन्न व अशुद्धि से बनाए हुए भोजन से दुख की ही प्राप्ति होगी। घर परिवार के लोगों की शुद्धि से समृद्धि की तरंगे प्रभावित होकर सकारात्मक परिणाम देती है। उन्होंने कहा, व्यक्ति चाहे आध्यात्मिक हो या सांसारिक सर्वोत्तम बनना है तो सुव्यवस्थित जीवन शैली का चिंतन करना ही होगा। पूज्य गुरुदेव ने कहा कि योग्यता के साथ व्यक्तिगत गुणों के विकास का ध्यान रखना आवश्यक है, ऐसे में किसी प्रकार का दुख, संकट अथवा कष्ट व्यक्ति को पीड़ा नहीं पहुंचा सकते। शास्त्रोक्त वक्तव्य का जिक्र करते हुए साधना के शिखर पुरुष संत श्रीजी ने कहा कि ज्ञानहीन पूजा, भक्ति एवं साधना नुकसानदायक होती है। कथा वाचन के बाद महायज्ञ में आहुतियां दी गई। रोहिणी नक्षत्र एवं भगवान भैरवदेव के प्रिय रविवार विशेष हवन यज्ञ की महत्ता को भी पूज्य गुरुदेव ने उल्लेखित किया। साथ ही बताया कि श्रावण मास विशेष 29 दिवसीय भक्ति आराधना के तहत सोमवार को श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में नवरात्रि स्थापना की महिमा प्रसंग पर कथा वाचन होगा। साथ ही राजयोग मुद्रा एवं आदिशक्ति मुद्रा की जानकारी भी दी जाएगी। आगामी 2 अगस्त को नाग पंचमी पर नाग देवता का हजारों लीटर दूध एवं पंचामृत से अभिषेक सहित एक हजार आठ प्रकार के नेवैद्य फल भोग का अर्पण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पूज्य गुरुदेवश्रीजी के अधिकृत यूट्यूब चैनल थॉट योगा से लाइव किया जा रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow