"पुण्य पूर्ण रूप से जब प्रकट हो तभी पूर्णाहुति संभव होती है"-दुख को कृष्णगिरी तीर्थ में मिला हुआ है श्राप : राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा.

"पुण्य पूर्ण रूप से जब प्रकट हो तभी पूर्णाहुति संभव होती है"-दुख को कृष्णगिरी तीर्थ में मिला हुआ है श्राप : राष्ट्रसंत डॉ वसंतविजयजी म.सा.

विद्या सागर संतश्रीजी बोले,  व्यक्ति का सद्गुण एवं विनय दुनिया में यश, कीर्ति दिलाता है

29 दिवसीय देवी भागवत, हवन की पूर्णाहूति से पूर्व मां के चरणों की सिद्ध चांदी की राखी उत्सव सहित अनेक कार्यक्रम तीर्थधाम में आज 

कृष्णगिरी। विश्वविख्यात कृष्णगिरी शक्तिपीठाधीपति, राष्ट्रसंत परम पूज्य गुरुदेवश्रीजी डॉ वसंतविजयजी महाराज साहेब ने कहा कि परमात्मा के किसी भी श्रद्धावान भक्त का जब पुण्य पूर्ण रूप से प्रकट होता है तब वह किसी पूर्णाहुति कार्यक्रम में शामिल होता है। श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थधाम में श्रावण मास विशेष 29 दिवसीय ज्ञान, भक्ति आराधना के तहत श्रीमद् देवी भागवत महापुराण एवं यज्ञ महोत्सव की शुक्रवार को पूर्णाहुति की पूर्व संध्या पर यह विचार पूज्य गुरुदेव श्रीजी ने व्यक्त किए। आयोजन में देश और दुनिया भर से बड़ी संख्या में सर्व धर्म समाज के श्रद्धालु भक्तजन शामिल हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि संत के चरणों के माध्यम से भगवान के चरणों तक पहुंचने के लिए मंदिर व तीर्थ धाम बने हैं, वे बोले अनंत पुण्योदय से ही कृष्णगिरी तीर्थ तक पहुंचा जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि दुख नाम को ही कृष्णगिरी तीर्थ धाम में श्राप मिला हुआ है, ऐसे में इस पवित्र पावन तीर्थ में ऐसी ऊर्जा की तरंगे हैं जहां किसी भी तरह का रोग–दुख नहीं, बल्कि प्रसन्न रहने एवं चमत्कारिक रुप से समृद्ध बनाने की शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि दुर्बुद्धि व्यक्ति को गलत स्थान पर और सुबुद्धि अच्छे स्थानों पर ले जाती है। इस अवसर पर देवी भागवतजी के माध्यम से श्री आदिशक्ति महामाया पद्मावती मां की महिमा का वर्णन करते हुए डॉ वसंतविजयजी महाराज साहेब ने कहा कि शब्दों के द्वारा कथाएं व्यक्ति के जीवन को परिवर्तित करती है तथा सर्वोत्तम एवं दृढ़ बनाती है। विनयवान एवं विवेकवान बनने की सीख देते हुए पूज्य गुरुदेवजी ने कहा कि व्यक्ति का विनय दुनिया में यश, कीर्ति दिलाता है। यही नहीं, जीवन में विनय व सद्गुणों से सफलता निश्चित है। सद्गुणी व संस्कारी व्यक्ति की मौत भी उत्सव बन जाती है। गुरु के शब्दों में शास्त्रों की सहमति की जानकारी के साथ विद्यासागर संतश्रीजी ने बगैर नाम के किसी भी प्रकार का गुप्त दान करने की प्रेरणा देते हुए दान की महिमा बताई तथा कहा कि शास्त्र, धर्म व सनातन की चिंता संत ही करते हैं। गुरु के द्वार पर ही शिष्यों को ऐसी शिक्षा मिलती है जिससे दुनिया में उस भक्त की ख्याति–प्रशंसा हो। साधना के शिखर पुरुष संतश्रीजी ने इस अवसर पर ज्ञान, शक्ति के साथ अपने लक्ष्य को करीब लाने वाले चमत्कारिक 48 दिवसीय दुर्लभ नाग मुद्रा के अभ्यास की जानकारी भी दी। अमित सिंह गायत्री परिवार कीकरवाला फाजिल्का एवं संगीता मुकेश परमार परिवार अहमदाबाद वालों ने देवी भागवतजी की आरती की व हवन यज्ञ का लाभ लिया। डॉ संकेश छाजेड़ ने बताया कि आयोजन की पूर्णाहुति से पूर्व शुक्रवार को प्रातः 9 बजे से रक्षाबंधन पर्व पर मां पद्मावती के चरणों की सिद्ध चांदी की राखी 108 बहनें अपने भाइयों की कलाइयों पर बांधेगी। सभी को उपहार व प्रसाद मिष्ठान वितरण होगा। इसके बाद पूज्य गुरुदेवजी की निश्रा में कथा एवं पूर्णाहुति के साथ कुमारी पूजा, बटुक पूजा, ब्राह्मण पूजा, दंपति पूजा के बाद अतिदिव्य मंत्र अभिषेक स्नान संपन्न होगा तथा पूर्णिमा की संध्या पर संगीतमय भक्ति होगी। आयोजन का सीधा प्रसारण थॉट योगा यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया जा रहा है।

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