मां पद्मावती की भक्ति में सबकुछ न्यौच्छावर कर दें : डॉ वसंतविजयजी म.सा.

मां पद्मावती की भक्ति में सबकुछ न्यौच्छावर कर दें : डॉ वसंतविजयजी म.सा.

नाग पंचमी पर विश्व इतिहास में सिर्फ कृष्णगिरी में ऐतिहासिक हजारों लीटर दूध, दही, घी, शहद व इक्षुरस से हुआ महाअभिषेक
  
आदिशक्ति देवी मां पद्मावती के समक्ष लगाये गए 1008 प्रकार के व्यंजन भोग प्रसाद, 5 अगस्त को पार्श्व प्रभू के मोक्ष कल्याणक दिवस पर रथ यात्रा व 2890 लड्डुओं का लगेगा भोग


कृष्णगिरी। तमिलनाडु प्रांत के विश्वविख्यात श्रीपार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थधाम कृष्णगिरी में  नाग पंचमी पर्व पर देवी–देवताओं का देश ही नहीं दुनिया भर में एकमात्र यहां ऐतिहासिक रूप से हजारों लीटर दूध, दही, घी, शहद, इक्षुरस तथा नारियल जल इत्यादि के द्वारा महाअभिषेक कर मनाया गया। भव्यातिभव्य इस महाअभिषेक के लिए भारत ही नहीं विदेशों से भी व्यापक स्तर पर गुरुभक्तों ने सहयोग प्रदान किया था। शक्तिपीठाधीपति, राष्ट्रसंत, परम पूज्य गुरुदेवश्रीजी डॉ वसंत विजय जी महाराज साहेब की पावन प्रेरणा एवं निश्रा में श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ भगवान, श्रीनागराज–नागरानी, देवी मां पद्मावती एवं नागराज देवता के अभिषेक, पूजन, श्रृंगार, आरती के बाद एक हजार आठ प्रकार के नैवेद्य, फल, भोग प्रसाद भी अर्पण किए गए। तीर्थ धाम में श्रावण मास विशेष 29 दिवसीय भक्ति आराधना के तहत श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं पद्मावती भैरव–महायज्ञ सुचारु रुप से 19वें दिन भी जारी रहा। जिसमें दिव्य रुप से सूखे मेवे व विविध रत्नों, औषधियों की आहुतियों का क्रम भी निर्बाध गति से प्रतिदिन जारी है। इस दौरान पूज्य गुरुदेव श्रीजी ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि श्रीआदिशक्ति, जगतजननी देवी मां पद्मावती की भक्ति में यदि सबकुछ न्यौच्छावर करना पड़े तो पीछे नहीं रहना चाहिए। जीवन में धर्म व संस्कार के साथ-साथ उपकार की प्रवृत्ति भी बेहद जरुरी है। जिस किसी भी व्यक्ति के जीवन में इन बातों का समावेश होता है, उनके जीवन में दरिद्रता कभी नहीं आती। उन्होंने जीवन में धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए यह भी कहा कि संतों के आशीर्वाद से ही श्रद्धालुओं से अच्छे कार्य होते हैं। उन्होंने कहा कि कोई काम करने से पहले विचार करना चाहिए, विचार विवेक से आता है। मन में पैदा हुए शुभ भावों पर तुरंत अमल करना चाहिए। डॉ वसंतविजयजी म.सा. ने कहा कि पुण्य, मन और आयुष्य इन तीन चीजों का भरोसा नहीं है, ये तीनों कभी भी बदल सकते हैं। संतों के तत्व ग्रहण करने व ईस्ट के चरण में विश्वास रखने की प्रेरणादाई सीख देते हुए उन्होंने कहा कि
व्यक्ति को मां की दिल खोल के भक्ति करनी चाहिए। यदि ऐसा कर लिया तो ममतामय मां भी दिल खोल के हमें आशीर्वाद देगी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का जब बुरा दौर आता है तभी उसे प्रभु की याद आती है और वह अपनी कामनापूर्ति के लिए प्रभु के पास जाकर मन्नत मांगते हैं। राष्ट्रसंत श्रीजी ने कहा कि यदि आपका हर समय अच्छा ही गुजरे तो हर मौके-दौर पर प्रभु को याद कर लेना चाहिए। डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने यह भी कहा कि प्रभु को हर समय में प्रार्थना करके रिझाया जा सकता है और ऐसे में व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी बदलाव आते हैं। कलयुग की चमत्कारी कृष्णगिरीवाली देवी मां पद्मावतीजी द्वारा अपने भक्तों पर किए गए अनेक चमत्कारिक प्रसंगों का बखान भी अनेक श्रद्धालुओं ने स्वयं किया। कार्यक्रम में इंटरनेशनल ड्रमर शिवमणि ने भी शिरकत कर पूज्य गुरुदेवश्रीजी का आशीर्वाद प्राप्त किया व अपनी प्रस्तुति दी। डॉक्टर संकेश छाजेड़ ने बताया कि 5 अगस्त सावन मास के तीसरे सोमवार को 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वप्रभु के मोक्ष कल्याणक अवसर पर मोक्ष साधना रथ तथा 2890 लड्डुओं का भोग तीर्थधाम में पार्श्व परमात्मा को लगाया जाएगा। आयोजन में देश और दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण पूज्य गुरुदेव के अधिकृत वेरीफाइड युटुब चैनल थॉट योगा पर लाइव प्रसारण किया गया।

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