प्रारब्ध कर्म का परिणाम है मनुष्य जन्म की प्राप्ति : ध्यानयोगी महर्षि उत्तमस्वामीजी

प्रारब्ध कर्म का परिणाम है मनुष्य जन्म की प्राप्ति : ध्यानयोगी महर्षि उत्तमस्वामीजी

श्रीमद् भागवत कथा रस मंदाकिनी प्रवाह का चतुर्थ दिवस

बांसवाड़ा। वर्तमान समय का मनुष्य जन्म हमारी प्रारंभ कर्म की परिणति है प्रत्येक जन्म में हम संचित , पाप , शुभ अशुभ और प्रारब्ध कर्म के परिणाम भोगते हैं। इसलिए अत्यंत दुर्लभ मनुष्य जन्म को भगवत स्मरण के साथ ईश्वरीय जब तक साधना के साथ ही सत कर्मों में बिताकर सफल बनाएं। उत्तम सेवा धाम बांसवाड़ा में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा रस मंदाकिनी प्रवाह के चतुर्थ दिवस के कथा क्रम में ध्यान योगी महर्षि उत्तमस्वामीजी स्वामी ईश्वरानंद जी महाराज ने सौवीं श्रीमद् भागवत कथा के संदर्भ में श्रद्धालुओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस जीवन में कुछ ना हो सके तो केवल सद्गुरु की शरण आ गति को प्राप्त हो जाओ परमात्मा स्वत: तुम्हें प्राप्त हो जाएंगे। भक्ति गीतों की स्वर लहरियों और आध्यात्मिक रस सृष्टि के बीच कथा श्रवण को उमड़ी श्रद्धालुओं के सैलाब से उत्तम सेवा धाम में इन दिनों वातावरण धार्मिकता से सराबोर हो रहा है।

संस्कारों के प्रति सावधान रहना का आह्वान..

कथा व्यास के रूप में उत्तम स्वामीजी महाराज ने कहा कि संस्कारों के बीजारोपण और संवर्धन के प्रति इस युग में भी माताओं को विशेष सावधान रहना चाहिए ।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं कि गर्भस्थ शिशु के रूप में अभिमन्यु ने ही चक्रव्यूह तोड़ने की कला सीख ली थी। कलिकाल में भी शिशु मां के गर्भ से वह सब कुछ सीखना आरंभ कर देता है जिससे उसका जीवन निर्माण होना है , इसलिए माताएं गर्भावस्था में सनातन धर्म के संस्कारों नैतिक मूल्यों और नर से नारायण बनने के उपक्रम से जुड़ा साहित्य पढ़े और सुने। गर्भावस्था में शिशु को सुसंस्कार मिलने लगेंगे तो आज भी मां के गर्भ से विवेकानंद , सुभाष चंद्र बोस , चंद्रशेखर आजाद , भगत सिंह आदि जन्म लेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा भोगी जाने वाली परिणाम हमारे पाप और पुण्य कर्मों का ही प्रतिबिंब होते हैं महाराज ने कहा सत्कर्म का फल श्रेष्ठ ही होता है पाप कर्म हमारा पीछा नहीं छोड़ते। आज भागवत पारायण में महाराजश्री ने हिरण्यकश्यप वध, प्रहलाद की भक्ति, भगवान नरसिंह अवतार, श्री कृष्ण जन्म के प्रसंगों पर आध्यात्मिक सरिता प्रवाहित की। कथा के दौरान बिज्येन्द्र सिंह चौहान, राजेन्द्र टेलर, गोपेश उपाध्याय, नरेन्द्र वैष्णव, दिलीप वैष्णव , जलज जानी, कुलदीप गृहस्थी, तपन मेघावत, शैलेश चोबीसा, कौटिल्य भट्ट, भगवती लाल सोनी, पवन पाठक, रामप्रसाद नायक व दीपक सोनी आदि उपस्थित रहे। संचालन भुवन मुकुंद पंड्या ने किया। शनिवार को इंदौर से गुरुभक्त राकेश जैन ने स्वामीजी के दर्शन वंदन कर आशीर्वाद लिया।

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