'सैंतीस प्रतिशत आबादी घटी ऊंटों की, बहुआयामी उपयोगिता की सोच बनानी जरुरी'

'सैंतीस प्रतिशत आबादी घटी ऊंटों की, बहुआयामी उपयोगिता की सोच बनानी जरुरी'

बीकानेर। ऊंट पालन व्‍यवसाय को मजबूती प्रदान करने के लिए इस प्रजाति का आर्थिकी दृष्टिकोण से उपयोग लिया जाना चाहिए, इस दिशा में खासकर उष्ट्र दुग्ध व्यवसाय से ऊंटपालकों की आय को बढ़ाना होगा ताकि उनके समाजार्थिक स्तर में अपेक्षित सुधार लाया जा सके। ये विचार आज राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र [एनआरसीसी] के 39 वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.एम.एस.साहनी, पूर्व निदेशक, एनआरसीसी ने व्यक्त किए। डॉ.साहनी ने संस्थान को स्थापना दिवस की बधाई संप्रेषित करते हुए इस अवसर पर रखी गई 'उष्ट्र उत्पाद प्रसंस्करण एवं विपणन में चुनौतियां' विषयक वैज्ञानिक.उष्ट्र हितधारक परिचर्चा के दौरान कहा कि दूध की औषधीय व पोषकीय महत्व को देखते हुए विशेषकर उष्ट्र.हित धारक, इसकी लोकप्रियता में वृद्धि हेतु आगे आएं। वहीं उन्होंने दूध की विभिन्न मानव रोगों यथा-मधुमेह, क्षय रोग आदि में महत्व को देखते हुए समन्वयात्मक अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
                   केन्द्र निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ आर्तबन्धु साहू ने कहा कि ऊंटों की लगभग 37 प्रतिशत आबादी घटी है जबकि पड़ौसी राज्‍य गुजरात में इसका असर कम पड़ा, इस हेतु प्रदेश में राजकीय पशु ऊंट संबंधी नीतिगत बदलाव अपेक्षित है। केन्द्र निदेशक ने साथ ही कहा कि प्रदेश के किसान को ऊंट की बहुआयामी उपयोगिता की सोच बनानी होगी क्योंकि इसके दूध, बाल, चमड़ी, खाद आदि सभी में उद्यमिता की प्रबल संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि केन्‍द्र इन सभी पहलुओं पर गहनता के साथ काम करते हुए आगे बढ़ रहा है। आज पर्यटन के क्षेत्र में पर्यटकों की सालाना संख्या लगभग 50 हजार पहुंच गई है। इसके हरेक पहलू के महत्व के आधार पर इसे 'औषधि का भण्डार' कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।   
                     कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे डॉ.जी.पी सिंह, पूर्व निदेशक, एनआरसीसी, डॉ.एन.वी.पाटिल, पूर्व निदेशक, एनआरसीसी, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र के अध्यक्ष डॉ.एस.सी.मेहता एवं केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्धान केन्द्र की प्रभागाध्यक्ष डॉ निर्मला सैनी ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। डॉ आर.के.सावल, अध्यक्ष, आयोजन समिति ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। स्थापना दिवस के इस अवसर पर वैज्ञानिक-उष्‍ट्र हितधारक परिचर्चा के चर्चा सत्र में भाग लेते हुए राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे उद्यमियों ने ऊंटनी के दूध व्यवसाय के बढ़ते कारोबार, व्यवसाय से जुड़े लघु उद्योगों तथा लोकप्रियता के बारे में अपने विचार रखे। केन्द्र द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में मैसर्स उरमूल, बज्‍जू, बीकानेर, मैसर्स सारिका राईका दूध भण्डार, जयपुर, मैसर्स आदर्श कैमल मिल्क, जयपुर, मैसर्स मंगलम आर्ट्स, जयपुर, मैसर्स मोदी डेयरी, बीकानेर, मैसर्स डेजर्ट हैण्डीक्राफ्ट, बीकानेर एवं मैसर्स पर्ल लेक्टो, जोधपुर के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

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